बर्दाश्तगी की हदों ने हमें हम से चुरा लिया
दूर रहकर जलाने वालों ने किया तो क्या बुरा किया
हम तो मुहब्बत में इस कदर लुट गए
जान ए वफ़ा की यादों ने अक्सर रुला दिया
हम तो कहते रहे ज़ालिम इस दिल से
की यादें उनकी भुलाया कर ....
कम्बख्त इस दिल ने हमारे यह ख़याल ही भुला दिया
पहले कभी हुआ करते थे हम आशिक ए इजहार
तेरी हसीं बेवफाई ने हमें शायर बना दिया
माना के हम ही करते रहे इकरार ए मोहब्बत
क्या तूने कभी यादों में भी मोहब्बत का ज़िक्र किया .......
दूर रहकर जलाने वालों ने किया तो क्या बुरा किया
हम तो मुहब्बत में इस कदर लुट गए
जान ए वफ़ा की यादों ने अक्सर रुला दिया
हम तो कहते रहे ज़ालिम इस दिल से
की यादें उनकी भुलाया कर ....
कम्बख्त इस दिल ने हमारे यह ख़याल ही भुला दिया
पहले कभी हुआ करते थे हम आशिक ए इजहार
तेरी हसीं बेवफाई ने हमें शायर बना दिया
माना के हम ही करते रहे इकरार ए मोहब्बत
क्या तूने कभी यादों में भी मोहब्बत का ज़िक्र किया .......